Dharmendra: असफलताओं से लड़कर आगे बढ़ने की मिसाल – जब बॉक्स ऑफिस पर लगी थी डिज़ास्टर की मुहर

Dharmendra: धर्मेंद्र के करियर में कई बड़ी फिल्में फ्लॉप रहीं, लेकिन उन्होंने हर असफलता के बाद खुद को और मजबूत बनाया। इस लेख में 5 फिल्मों, उनकी असफलता के कारणों और धर्मेंद्र की अटूट लोकप्रियता की कहानी पढ़ें।

Jyotsana Singh
Published on: 24 Nov 2025 3:28 PM IST (Updated on: 24 Nov 2025 3:38 PM IST)
Dharmendra: असफलताओं से लड़कर आगे बढ़ने की मिसाल – जब बॉक्स ऑफिस पर लगी थी डिज़ास्टर की मुहर
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बॉलीवुड के इतिहास में अगर किसी अभिनेता ने अपनी मुस्कान, मासूमियत और सादगी से दर्शकों का दिल जीता है, तो वह हैं धर्मेंद्र। अपने समय के सबसे आकर्षक, सबसे प्रतिभाशाली और सबसे विनम्र सितारों में गिने जाने वाले धर्मेंद्र ने 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। उनके एक्शन का तेवर, रोमांस की मिठास और इमोशन की गहराई इन तीनों ने मिलकर उन्हें ‘ही-मैन’ का खिताब दिलाया। लेकिन हर चमकते सितारे के पीछे कुछ ऐसे अध्याय भी होते हैं जो बेहद दर्द भरे होते हैं। धर्मेंद्र के करियर में भी कुछ फिल्में आईं जिनसे उम्मीदें आसमान पर थीं, मगर पर्दे पर टकराते ही ये फिल्में ऐसे टूटीं कि बॉक्स ऑफिस पर हलचल मच गई। इन फिल्मों में हेमा मालिनी, सनी देओल, बॉबी देओल और ईशा देओल तक शामिल थे, फिर भी स्टारकास्ट की ताकत कहानी को नहीं बचा सकी।

सुपरस्टार होना आसान नहीं, और सुपरस्टार रहते हुए असफल होने पर भी सिर ऊंचा रखना उससे भी मुश्किल है। लेकिन धर्मेंद्र ने हर मुश्किल दौर के बाद खुद को और मजबूत बनाया। उनके जीवन की 5 फ्लॉप फिल्में भले ही उनके करियर के दर्द भरे अध्याय रहीं हों, लेकिन यह भी सच है कि कलाकार का कद उसकी असफलताओं से नहीं, बल्कि उसकी लोकप्रिया की ताकत से तय होता है।

आइए जानते हैं उन 5 फिल्मों के बारे में जिन्होंने धर्मेंद्र के सुनहरे करियर में रुकावट डालने का प्रयास किया...

‘टेल मी ओ खुदा’ बड़ी स्टारकास्ट भी कहानी

धर्मेंद्र, हेमा मालिनी की हिट जोड़ी के साथ उनकी बेटी ईशा देओल को एक साथ देखने की उत्सुकता हर दर्शक के दिल में हिलोरे मार रही थी। वहीं जब हेमा मालिनी ने खुद 'टेल मी ओ खुदा' फिल्म को डायरेक्ट और प्रोड्यूस किया था, जिससे उम्मीदें और बढ़ गईं। सलमान खान की मौजूदगी, विनोद खन्ना, ऋषि कपूर, फारूक शेख जैसे दिग्गज अभिनेता की मौजूदगी के साथ सब कुछ परफेक्ट लग रहा था, लेकिन फिल्म की आत्मा यानी कहानी कमजोर थी। चोटी के कालाकारों की फेहरिस्त के बावजूद भी इस फिल्म में न इमोशन असर कर पाए, न कॉमेडी ध्यान खींच पाई। नतीजा यह हुआ कि फिल्म सिर्फ 1.28 करोड़ का बिज़नेस कर पाई और फ्लॉप साबित हुई।

‘आतंक’

यह फिल्म एक उदाहरण है कि लंबी देरी किसी भी प्रोजेक्ट को कैसे नुकसान पहुंचा सकती है। धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की ब्लॉकबस्टर जोड़ी के बावजूद ‘आतंक’ वह असर छोड़ने में असफल रही जिसकी उम्मीद की गई थी। कहानी 1980 में शुरू हुई शूटिंग से 1996 की रिलीज़ तक ठहरकर रह गई। इस दौरान तकनीक बदल गई, दर्शकों की पसंद बदल गई और स्टार्स का लुक भी बदल चुका था। हॉलीवुड की ‘जॉज’ जैसी कॉन्सेप्ट फिल्म उस समय भारतीय दर्शकों के लिए बिलकुल अनफिट थी। नतीजे में फिल्म करीब 2.55 करोड़ तक ही सिमट गई और ताश के पत्तों की तरह बिखर गई।

‘पत्थर और पायल’

धर्मेंद्र और हेमा मालिनी की जोड़ी हमेशा बड़े पर्दे पर जादू बिखेरती आई है, लेकिन हर प्रयोग सफल नहीं होता। ‘पत्थर और पायल’ में विनोद खन्ना और अजीत जैसे मजबूत कलाकार थे, फिर भी कहानी पुराने दौर के मसालों पर ही टिकी रह गई। 90 के दशक के बाद दर्शकों का नजरिया पूरी तरह से बदल चुका था, उनकी पसंद में ताजगी और नई सोच की मांग बढ़ गई थी। फिल्म न रोमांस में चमक दिखा सकी, न एक्शन में मजबूती। बॉक्स ऑफिस पर भी इसकी कमाई 1.75 करोड़ से आगे नहीं बढ़ पाई और यह भी बुरी तरह फ्लॉप हो गई।

'यमला पगला दीवाना 2’

'यमला पगला दीवाना' इस पहली फिल्म की सफलता ने दर्शकों की उत्सुकता चरम पर पहुंचा दी थी। देओल फैमिली के सदस्य धर्मेंद्र, सनी और बॉबी इस फिल्म में एक साथ दिखाई दिए। जिसमें कॉमेडी का ठहाका भी था, लेकिन कहानी कमजोर थी और प्लॉट बिखरा हुआ था। जबरदस्ती डाले गए पंच, लाउड ह्यूमर और बिना तालमेल की कॉमेडी दर्शकों को हंसाने के बजाय थका गई। फिल्म ने 33.7 करोड़ तो कमाए, लेकिन बजट और उम्मीदों के हिसाब से यह एक बड़ी फ्लॉप साबित हुई।

‘यमला पगला दीवाना फिर से’

देओल परिवार ने इस सीरीज को दोबारा जगाने की कोशिश की, लेकिन ‘यमला पगला दीवाना फिर से’ भी उसी राह पर चली, जिस पर पहले सीक्वल ठोकर खा चुका था।

कहानी में दम नहीं था, भावनाओं का असर फीका पड़ गया और कॉमेडी का स्तर बहुत नीचे चला गया।

फिल्म ने दर्शकों को सिनेमाघर तक खींचने की कोशिश तो की, लेकिन बॉक्स ऑफिस पर यह भी बुरी तरह धराशायी हो गई।

ये फिल्में फ्लॉप क्यों हुईं? असफलताओं की जड़ में थीं ये बड़ी खामियां

कमजोर कहानी और बिखरी स्क्रिप्ट

हर फिल्म की असली ताकत उसकी कहानी होती है। इन फिल्मों में प्लॉट कमजोर रहा, जिससे दर्शक शुरुआत से ही जुड़ नहीं पाए।

पुराने फॉर्मूले पर आधारित कंटेंट

दर्शकों का स्वाद बदल चुका था, लेकिन फिल्मों में वही पुरानी स्टाइल और क्लिशे ड्रामा परोसा गया, जिसने असर खो दिया।

तकनीकी खामियां और क्रिएटिव कमी

खासतौर पर ‘आतंक’ जैसी फिल्में तकनीकी कमियों की वजह से वक्त की मांग के मुकाबले कमजोर पड़ गईं।

स्टारकास्ट पर ज़रूरत से ज्यादा निर्भरता

धर्मेंद्र की लोकप्रियता बेहद बड़ी थी, लेकिन सिर्फ स्टार पावर किसी फिल्म को नहीं बचा सकती इसके लिए दमदार कंटेंट जरूरी होता है।

लेकिन ये फ्लॉप फिल्में धर्मेंद्र की लोकप्रियता के आगे बौनी साबित हुईं। आज भी धर्मेंद्र अपने चाहने वाले लाखों दिलों पर राज करते हैं क्योंकि उनका लाजवाब अभिनय और उनकी मासूम मुस्कराहट से भरी उनकी शख्सियत की गूंज वक्त से कहीं आगे है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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