Sonbhadra: धारा 80 की आड़ में हथियाई जा रही जनजातीय समाज की जमीन, CO के सामने पहुंचा धोखाधड़ी का मामला

Sonbhadra News: एक धोखाधड़ी का प्रकरण पिछले दिनों क्षेत्राधिकारी नगर के पास पहुंचा तो उनकी तरफ से कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

Kaushlendra Pandey
Published on: 13 Aug 2025 6:20 PM IST
Sonbhadra News
X

Sonbhadra News

Sonbhadra News: जिले में अनूसूचित जनजाति को पिछड़ा वर्ग का दिखाकर जमीनों को कथित लूट का खेल तो खेला ही गया है। धारा 80 यानी अकृषिक की आड़ मे भी जमीनों को औन-पौने दामों पर हथियाने, बिचौलियागिरी के जरिए बड़े मुनाफे का खेल खेला जा रहा है। चर्चाओं की मानें तो, जमीन लूट के इस कथित खेल को राजस्वकर्मियों के भी एक बड़े सिंडीकेट का संरक्षण हासिल है। ऐसे ही मामले से जुड़ा एक धोखाधड़ी का प्रकरण पिछले दिनों क्षेत्राधिकारी नगर के पास पहुंचा तो उनकी तरफ से कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

इसके क्रम में राबटर्सगंज कोतवाली पुलिस ने कैमूर (बिहार) जिले के रहने वाले एक व्यक्ति के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया हैं। उस पर अनुसूचित जनजाति की जमीनों को धारा 80 के जरिए दूसरे वर्ग के लोगों को बिक्री कराने, इस खरीद-फरोख्त में बिचौलियागिरी करने और सब कुछ सही होने का झांसा देकर, रुपये ऐंठने का आरोप है। प्रकरण में मंगलवार को बीएनएस की धारा 316(2), 351(2) के तहत केस दर्ज कर छानबीन शुय कर दी गई है।

धारा 80 की आड़ में एसटी की जमीन को एससी का बताकर किया जा रहा था सौदा

राबटर्सगंज कोतवाली क्षेत्र के ब्रह्मनगर मोहल्ले के रहने वाले प्रताप कुमार पाल को जमीन लेनी थी। उन्होंने क्षेत्राधिकारी को दी तहरीर में बताया है कि उनके संस्थान के पूर्व प्राचार्य ने नित्यानंद पुत्र लालजी चौहान मूलतः निवासी रेतवा चंद्रभानपुर, पोस्ट व थाना लालगंज, तहसील-लालगंज, जिला आजमगढ़, हाल पता एनएसई पब्लिक स्कूल दारीहरा, कोल्हुआ, अधौरा, जिला कैमूर, बिहार के जरिए जमीन की खरीद-फरोख्त की थी। नित्यानंद का काम मूलतः जमीन की दलाली करना है।

राबर्टसगंज तहसील में हर दूसरे-तीसरे दिन उसका आना होता है और वह दलाल के रूप में जमीन के क्रय विक्रय का कार्य कराता है। उन्हें भी जमीन लेनी थी, इसलिए उन्होंने उससे नवंबर 2023 में संपर्क साधा तो उसे राबटर्सगंज कोतवाली क्षेत्र के राजस्व ग्राम करमटाड़ में अनुसूचित जाति की जमीन की धारा 80 कराने बाद दिलवाने का वायदा किया। फरवरी 2024 में उसे पता चला कि जिस जमीन को धारा 80 कराकर बिक्री कराने की बात कही गई है। वह जमीन अनुसूचित जनजाति की है ओर सीलिंग एक्ट के अंतर्गत दान दी गई अकृषि, असंक्रमणीय भूमि है जिसे नियमानुसार क्रय कर पाना काफी मुश्किल है।

नियमों की हुई जानकारी तो पीड़ित ने कर दिया खरीदारी से इंकार

जब पीड़ित को इस बात की जानकारी हुई एसटी की जमीन एसटी ही ले सकता है क्योंकि जनजातीय समाज के हितों की रक्षा के लिए, इसको लेकर सरकार के तरफ से कड़े प्रावधान बनाए गए हैं, तो उसने जमीन की खरीदारी से इंकार दिया और जमीन दिलाने के एवज में दी गई रकम को वापस करने के लिए दबाव देने लगा तो आरोपी ने तरह-तरह की बहानेबाजी शुरू कर दी।

पीड़ित का कहना है कि उपरोक्त जमीन को खरीदने के लिए नित्यानंद ने एडवांस के रूप में चार लाख लिए थे। ढेरों तगादा और काफी दबाव के बाद उसने किसी तरह एक लाख 60 हजार वापस किए लेकिन शेष दो लाख 40 हजार की रकम वापस करने से इंकार कर दिया। 30 जून 2025 को उसने इस बात का लिखित वायदा भी किया था कि 15 जुलाई 2025 तक एक लाख और वापस कर देगा लेकिन उसने वह रकम भी नहीं दी। तब सीओ से मिलकर कार्रवाई की गुहार लगाई गई। प्रभारी निरीक्षक राबटर्सगंज के मुताबिक प्रकरण में बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। छानबीन जारी है।

डीएम ने दिए थे जांच के निर्देश, वीआईपी सर्किलों के रसूख ने रोक दी फाइल

सोनभद्र मे अनसुचित जनजाति की जमीनों को धारा 80, इससे पहले धारा 143 के तहत अकृषिक कराकर, उसकी खरीद-फरोख्त कराने के मामले की तत्कालीन डीएम चंद्रविजय सिंह ने जांच के निर्देश दिए थे। सभी तहसीलों से इसको लेकर रिपोर्ट तलब की गई थी। साथ ही, आगे से एसटी की जमीनों के धारा 80 का प्रस्ताव बगैर गहन जांच-पड़ताल के स्वीकार न किया जाए, इसके भी निर्देश दिए थे लेकिन उनके तबादले के साथ ही, जहां जांच और गहन-छानबीन का मसला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। वहीं, जिले के दूसरे हिस्सों में कौन कहे, वीआईपी सर्किलों में भी इसी तरह से धारा 80 कराकर, जमीनों के खरीद‘-फरोख्त का मसला चर्चा में बना हुआ है।

कहा जा रहा है कि जिले के आदिवासी बहुल गांवों-ब्लाकों की जांच में तो ऐसे मामले आएंगे ही, राजस्व कर्मियों की तैनाती के मामले में वीवीआईपी एरिया/गांव का दर्जा रखने वाले लोढ़ी, उरमौरा, मेहुड़ी, रौप, सहिजन के महज 10 से 20 सालों के रिकार्ड के साथ ही, पिछले तीन से चार सालों का भी रिकार्ड और उसके खरीद-फरोख्त का सच गहनता से खंगाल लिया जाए तो ऐसे सच सामने आएंगे कि लोग हैरान रह जाएंगे। कहा जा रहा है कि वीआईपी सक्रिल् में हुए इस कथित खेल से कई रसूखदारों का जुड़ाव होने के कारण ही पिछले डीएम ने जो जांच के निर्देश दिए, वह फाइल राजस्वकर्मियों के स्तर पर जांच-रिपोर्ट के दांव-पेंच में दबी रह गई।

जानिए क्या है धारा 80 और क्यों नहीं करनी चाहिए ऐसी जमीन की खरीद

धारा 80 किसी भी जमीन के आवासीय या वाणिज्यिक उपयोग के लिए प्रयोग की जाती है। इसके लिए शर्त होती है कि पांच वर्ष के भीतर जिस प्रयोजन के लिए धारा 80 का लाभ लिया जा रहा है, उसे पूरा कर लिया जाए नहीं तो अकृषिक हुई जमीन खुद ब खुद पुरानी स्थिति में परिवर्तित हो जाएगी। साथ ही धारा 80 की प्रक्रिया के समय ऐसी जमीन पर, आवासीय या वाणिज्यिक जो उद्देश्य दर्शाया गया हो, उसकी गतिविधि-प्रमाण दिखने चाहिए। इसको लेकर जहां लेखपाल की तरफ से स्थलीय निरीक्षण कर बाकायदा रिपोर्ट सौपी जाती है।

वहीं, कानूनगो को इसके पर्यवेक्षण का दायित्व निभाना पड़ता है। इन दोनों राजस्वकर्मियों की रिपोर्ट के आधार पर भी एसडीएम स्तर से, संबंधित जमीन को अकृषिक घोषित करने की स्वीकृति दी जाती है लेकिन ऐसी जमीनों का पांच साल बाद क्या स्थिति है, इसकी जांच करना दूर, ऐसी जमीनों का पांच साल के भीतर वय-बेची तो नहीं कर दिया गया, इसके भी जांच की जरूरत शायद ही समझी जाती है। अगर जमीन एसटी की है तो इसको लेकर अलग से विशेष प्रतिबंध हैं। यह बाद दीगर है कि अगर खरीदार रसूखदार है और संबंधित राजस्वकर्मी पक्ष में हैं तो सारे प्रतिबंध जमीन पर भले ही प्रभावी न हों, कागज पर दुरूस्त दिखा दिए जाते हैं।

1 / 7
Your Score0/ 7
Kaushlendra Pandey
ABOUT THE AUTHOR

Kaushlendra Pandey

Next Story